आखिर क्यों मनाया जाता है "1मई"को "विश्व मजदूर दिवस"(WORLD LABOUR DAY-WLD)••••?????जानीये मजदूर से जुड़ी रोचक-ज्ञानवर्धक सुनी-अनसुनी बातें ••••••
- सर्वप्रथम वर्ष 1889 में समाजवादी समूहों और ट्रेड यूनियनों के एक अंतर्राष्ट्रीय महासंघ ने शिकागो में हुई हे मार्केट (Haymarket, 1886) घटना को याद करते हुए श्रमिकों के समर्थन में 1 मई को ‘मई दिवस’ के रूप में नामित किया था।
- अमेरिका ने वर्ष 1894 में श्रमिक दिवस को एक अवकाश के रूप में मान्यता दी, जहाँ यह प्रत्येक वर्ष सितंबर के पहले सोमवार को मनाया जाता है। जल्द ही, कनाडा ने भी इस प्रथा को अपना लिया।
- वर्ष 1889 में समाजवादी और श्रमिक दलों द्वारा बनाई गई संस्था सेकंड इंटरनेशनल (Second International) ने घोषणा की कि अब से 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
- वर्ष 1904 में, एम्स्टर्डम (Amsterdam) में इंटरनेशनल सोशलिस्ट काॅॅन्ग्रेस (International Socialist Congress) ने सभी सोशल डेमोक्रेटिक संगठनों और सभी देशों की ट्रेड यूनियनों को एक दिन में कार्य के 8 घंटे की प्रथा की कानूनी स्थापना के लिये एक मई को उत्साहपूर्वक प्रदर्शन करने का आह्वान किया।
- अंततः वर्ष 1916 में अमेरिका ने वर्षों के विरोध और संघर्ष के पश्चात् आठ घंटे के कार्य समय को आधिकारिक पहचान देना शुरू किया।
- 1 मई, 1886 को शिकागो में हड़ताल का रूप सबसे आक्रामक था। शिकागो उस समय जुझारू वामपंथी मज़दूर आंदोलनों का केंद्र बन गया था।
- 1 मई को शिकागो में मज़दूरों का एक विशाल सैलाब उमड़ा और संगठित मज़दूर आंदोलन के आह्वान पर शहर के सारे औज़ार बंद कर दिये गए और मशीनें रुक गईं।
- मज़दूर आंदोलन को कभी भी वर्ग-एकता के इतने शानदार और प्रभावी प्रदर्शन का एहसास नहीं हुआ था। इस आंदोलन ने अमेरिकी मज़दूर वर्ग की लड़ाई के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया।
- हालाँकि इस दौरान शिकागो प्रशासन एवं मालिक चुप नहीं बैठे और मज़दूरों को गिरफ्तारी शुरू हो गई। जिसके पश्चात् पुलिस और मज़दूरों के बीच हिंसक झड़प शुरू हो गई, जिसमें 4 नागरिकों और 7 पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई।
- कई आंदोलनकारी, जो श्रमिकों के अधिकारों के उल्लंघन का विरोध कर रहे थे और काम के घंटे कम करने और अधिक मज़दूरी की मांग कर रहे थे उन्हें गिरफ्तार कर रहे थे और आजीवन कारावास अथवा मौत की सजा दी गई।
- श्रम न केवल उत्पादन में, बल्कि अन्य सभी आर्थिक गतिविधियों में भी एक महत्त्वपूर्ण कारक होता है। डेविड रिकार्डो और कार्ल मार्क्स जैसे क्लासिक अर्थशास्त्रियों ने उत्पादन के मुख्य स्रोत के रूप में श्रम को प्रमुख स्थान दिया।
- इस प्रकार श्रमिक किसी भी देश के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। श्रमिकों की इसी भूमिका को एक पहचान देने और श्रमिक आंदोलनों के गौरवशाली इतिहास को याद करने के उद्देश्य से ‘मई दिवस’ अथवा ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस’ मनाया जाता है।
- विश्व के अधिकांश देशों में मई दिवस को एक ‘अवकाश’ घोषित किया गया है, विडंबना यह है कि नई पीढ़ी ‘मई दिवस’ को केवल एक अवकाश के रूप में ही जानती है, लोगों के ज़हन में ‘मई दिवस’ और श्रमिकों की भूमिका धीरे-धीरे धूमिल होती जा रही है।
- मई दिवस का जन्म काम के घंटे कम करने के आंदोलन से अटूट रूप से जुड़ा हुआ है। काम के घंटे कम करने और मज़दूरों को उनके बुनियादी अधिकार दिलाने से संबंधित इस दिवस का मज़दूरों के लिये एक विशेष राजनीतिक महत्त्व है।
- जब अमेरिका में फैक्ट्री-व्यवस्था शुरू हुई, लगभग तभी यह संघर्ष भी सामने आया। हालाँकि अमेरिका में अधिक मज़दूरी की मांग, शुरुआती हड़ताल और संघर्ष में सर्वाधिक प्रचलित थी, किंतु जब मज़दूरों ने अपनी मांगों को सूचीबद्ध किया तो काम के घंटे कम करने का प्रश्न और संगठित होने के अधिकार का प्रश्न केंद्र में रहा।
- जैसे-जैसे शोषण बढ़ता गया, मज़दूरों को अमानवीय रूप से लंबे काम के दिन और भी बोझिल महसूस होने लगे, इसके साथ ही काम के घंटों को कम करने की मांग भी और अधिक मज़बूत होती गई।
- 19वीं सदी की शुरुआत में ही अमेरिका में मज़दूरों ने ‘सूर्योदय से सूर्यास्त’ (Sunrise to Sunset) तक के काम के समय के विरोध में अपनी शिकायतें स्पष्ट कर दी थीं। ध्यातव्य है कि वर्ष 1806 में अमेरिका की सरकार ने कुछ हड़तालियों के नेताओं पर मुकदमे चलाए। इस मामले में यह बात सामने आई कि मज़दूरों से तकरीबन 19 से 20 घंटे तक कार्य कराया जाता था।
- 19वीं सदी का दूसरा और तीसरा दशक काम के घंटे कम करने के लिये हड़तालों से भरा हुआ है। इसी दौर में कई औद्योगिक केंद्रों ने तो एक दिन में काम के घंटे 10 करने की मांग भी निश्चित कर दी थी।
- उल्लेखनीय है कि वह संघर्ष, जिससे ‘मई दिवस’ का जन्म हुआ, अमेरिका में वर्ष 1884 में ‘काम के घंटे आठ करो’ आंदोलन से ही शुरू हुआ था।
- भारत में मज़दूर दिवस पहली बार चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) में 1 मई, 1923 को आयोजित गया था। यह पहल सर्वप्रथम लेबर किसान पार्टी के प्रमुख सिंगारवेलर द्वारा की गई थी।
- लेबर किसान पार्टी के प्रमुख सिंगारवेलर ने इस अवसर को मनाने के लिये दो बैठकों का आयोजन किया। इनमें से एक ट्रिप्लिकेन बीच पर आयोजित की गई और दूसरी मद्रास उच्च न्यायालय के सामने समुद्र तट पर आयोजित की गई।
- इन बैठकों में सिंगारवेलर ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें कहा गया था कि ब्रिटिश सरकार को भारत में मई दिवस या मज़दूर दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा करनी चाहिये।
- मज़दूर दिवस या मई दिवस को भारत में 'कामगार दिन’ के रूप में भी जाना जाता है, मराठी में इसे ‘कामगार दिवस' और तमिल में 'उझिपालार नाल' (Uzhaipalar Naal) कहा जाता है।
- भारत में वर्ष 1986 का बाल श्रम अधिनियम, जिसके तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नियोजित करना प्रबंधित कर दिया, बेहतर श्रम मानकों को प्राप्त करने और बच्चों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार को समाप्त करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम था।
अमेरिका ने 1894 में श्रमिक दिवस को एक संघीय अवकाश के रूप में मान्यता दी, जहां यह हर साल सितंबर के पहले सोमवार को मनाया जाता है। जल्द ही, कनाडा ने भी इस प्रथा को अपनाया। 1889 में, समाजवादी और श्रमिक दलों द्वारा बनाई गई संस्था द सेकंड इंटरनेशनल ने घोषणा की कि 1 मई को तब से अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। अंततः 1916 में, अमेरिका ने वर्षों के विरोध और उठापटक के बाद आठ घंटे के कार्य समय को पहचानना शुरू किया।
1904 में, एम्स्टर्डम में इंटरनेशनल सोशलिस्ट कांग्रेस ने सभी सामाजिक लोकतांत्रिक पार्टी संगठनों और सभी देशों के ट्रेड यूनियनों को सर्वसम्मति से, वर्गीय मांगों के लिए, 8 घंटे के दिन की कानूनी स्थापना के लिए पहली मई को ऊर्जावान रूप से प्रदर्शित करने के लिए बुलाया और सार्वभौमिक शांति के लिए और सभी देशों के सर्वहारा संगठनों पर 1 मई को काम करना बंद कर दिया, जहाँ भी मज़दूरों को चोट पहुँचाए बिना यह संभव है।
1917 में रूसी क्रांति के बाद, शीत युद्ध के दौरान सोवियत संघ और पूर्वी ब्लॉक देशों द्वारा उत्सव मनाया गया था। परेड उत्सव का एक हिस्सा थे- मॉस्को के रेड स्क्वायर में शीर्ष कम्युनिस्ट नेताओं ने भाग लिया, और सोवियत सेना को प्रदर्शित किया।
भारत में, मई दिवस पहली बार 1 मई 1923 को मनाया गया, जब लेबर किसान पार्टी ऑफ़ हिंदुस्तान ने शुरुआत की और कॉमरेड सिंगारवेलर (सिंगारवेलु चेट्टियार) ने इस समारोह को आयोजित किया। दो सभाओं में - एक ट्रिप्लिकेन बीच पर और दूसरा मद्रास हाईकोर्ट के सामने वाले समुद्र तट पर - कॉमरेड, मद्रास प्रेसीडेंसी में सेल्फ रेस्पेक्ट आंदोलन के नेताओं में से एक के रूप में जाना जाता है और पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई के लिए पारित हुआ। संकल्प बताते हुए कि सरकार को मजदूर दिवस पर सभी को राष्ट्रीय अवकाश की अनुमति देनी चाहिए।
- श्रम को प्रतिष्ठा पूर्ण स्थान दिलवाने के आह्वान का दिन है मई दिवस– विश्व की कार्यशील जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा संगठित और असंगठित श्रमिकों का है और श्रमिक जिसे कामगार मजदूर अथवा लेबर के नाम से जाना जाता है उनके श्रम को प्रतिष्ठा पूर्ण स्थान दिलाने के आह्वान के लिए विश्व के अधिकांश देशों में मई माह के पहले दिन 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाता है जिसको मई दिवस के नाम से भी जाना जाता है इसकी शुरुआत सन 1886 में शिकागो में उस समय हुई थी जब मजदूर मांग कर रहे थे कि उनके काम की अवधि प्रतिदिन 8 घंटे हो और सप्ताह में 1 दिन की छुट्टी दी जाए इस मांग के समर्थन में मजदूरों ने हड़ताल भी की हड़ताल के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने श्रमिकों की भीड़ में बम फोड़ दिया प्रतिक्रिया स्वरूप बाद में पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी इस में कुछ मजदूरों की मौत हो गई साथ ही कुछ पुलिस अफसर भी मारे गए इस हादसे पर वैश्विक स्तर पर गहन विमर्श हुआ और इसके बाद वर्ष 1889 में पेरिस में हुई अंतर्राष्ट्रीय महासभा की बैठक में फ्रेंच क्रांति को याद करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया कि मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई को वैश्विक समर्थन देने के लिए 1 मई को प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाए इस निर्णय के बाद दुनिया के 80 से भी अधिक देशों में मई दिवस को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाया जाने लगा । International labour day-व्यवस्थाओं के बदलाव से कम नहीं हुई मई दिवस की प्रासंगिकताविश्व में इन दिनों समाजवादी और साम्यवादी शासन व्यवस्था भी अपने मूल स्वरूप से भिन्न हो गई है और ऐसे में श्रमिकों के संघर्ष के प्रतीक मई दिवस की प्रासंगिकता पर इन दिनों विमर्श चल रहा है वैसे सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषक यह मानते हैं कि विश्व के कई देशों में शासन व्यवस्थाओं के बदलाव के बाद भी मई दिवस की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है और ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो सर्वहारा वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिए दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ का जो नारा दिया गया था वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है अमीर और गरीब देशों के बीच फर्क था वह आज भी मौजूद है और विश्व में आज भी कुशल और अकुशल श्रमिक एक साथ ट्रेड यूनियन में भागीदार नहीं हो पाते हैं इस बुनियादी तथ्यों के बावजूद विश्व में मजदूरों को उनके अधिकार दिलवाने के लिए मई दिवस की प्रासंगिकता पूर्ववत है प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सारे श्रमिक संगठनों के नेता अपने देश के झंडे के नीचे आ गए विश्व युद्ध के दौरान जब सोवियत संघ संकट में था तब वह यह नारा दिया गया कि मजदूर और समाजवाद अपनी अपनी पैतृक सम्पति को बचाए इसके बाद हम देखते हैं कि पश्चिमी देशों में कल्याणकारी राज्य आया और मई दिवस पुनर्जागरण हुआ अब दुनिया बदल चुकी है औद्योगिक उत्पादन का तरीका बदल गया उत्पादन तंत्र का विस्तार पूरी दुनिया में हो गया एक साथ काम करना और एक जगह रहना महज एज सपना रह गया है इस सबके बावजूद मशीनीकरण का और रोबोट के उपयोग के विरुद्ध इस दिन आंदोलन चलाकर विरोध दर्ज किया जाता है । International labour day-कामगारों के हक की लड़ाई में सहभागी होता है अंतरराष्ट्रीय श्रम संघअंतर्राष्ट्रीय श्रम संघ अंतरराष्ट्रीय आधारों पर मजदूरों तथा श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए नियम बनाता है यह संयुक्त राष्ट्र की विशिष्ट संस्था है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजदूरों के अधिकारों के लिए अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन का गठन किया गया यह एक ऐसी संस्था है जो संयुक्त राष्ट्र से संबंध है या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर श्रमिक मुद्दों को देखने के लिए स्थापित हुई थी संयुक्त राष्ट्र में 193 सदस्य हैं इसमें से 187 राष्ट्र इस संगठन के सदस्य हैं विभिन्न वर्गों के बीच में शांति प्रचारित करने के लिए मजदूरों के मुद्दों को देखने के लिए राष्ट्र को विकसित बनाने के लिए उन्हें तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए वर्ष 1969 में इसे नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन मजदूर वर्ग के लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों के उल्लंघन की सभी शिकायतों को देखता है इसके पास त्रिकोणीय संचालन सरंचना है अर्थात सरकार नियोक्ता और मजदूर का प्रतिनिधित्व करना और सरकारी अंगों और सामाजिक सहयोगियो के बीच मुक्त और खुली चर्चा उत्पन्न करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समिति कार्यालय के रूप में अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन सचिवालय कार्य करता है अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन के कार्यों में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन करना मुख्य निदेशक को चुनना मजदूरों के मामले के बारे में सदस्य राज्य के साथ व्यवहार करना अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक कार्यालय की कार्यवाही के संचालन की जिम्मेदारी की साथ ही जांच कमीशन की नियुक्ति के बारे में योजना बनाने या फैसला लेना भी शामिल है ।-श्रमिकों के बूते ही खड़ा होता है एक समर्थ औद्योगिक ढांचा अर्थशास्त्र के आरंभिक पाठ में ही यह सिखाया जाता है कि औद्योगिक उत्पादन की प्रभावी कारक होते हैं मेन मटेरियल और मशीनरी मजदूर कच्चा माल और मशीने की सिर्फ उद्योग ही नहीं किसी भी समाज देश और संस्था में मजदूरों कामगारों और मेहनतदेही की अहम भूमिका होती है उनकी बड़ी संख्या देश समाज और संस्थान को कामयाबी के लिए हाथों अकल और तनदेही के साथ जुडी होती है किसी भी उद्योग में कामयाबी के लिए मालिक कामगार सरमागरा और सरकार अहम होते हैं कुशल श्रमिक से ही कोई उद्योग महत्तम उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त कर सकता है इसी परिप्रेक्ष्य में कुशल श्रमिकों की कार्यक्षमता और कार्य योजना की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए आदर्श कार्य दशा पर ध्यान आकर्षण के लिए मई दिवस का आयोजन आरंभ किया । International labour day-भारत में वर्ष 1923 से मनाया जाता है मई दिवसभारत में मई दिवस का आयोजन सबसे पहले चेन्नई में 1 मई 1923 को किया गया था उस समय इसे मद्रास दिवस के नाम से भी जाना गया जो बाद में मजदूर दिवस कहा जाने लगा इसकी शुरुआत भारतीय मजदूर किसान पार्टी के नेता सिंगरावेलु चेटियार ने की थी भारत में मद्रास के हाई कोर्ट के सामने बड़ा प्रदर्शन किया और एक संकल्प पारित करके यह सहमति बनाई कि इस दिवस को भारत में भी कामगार दिवस के तौर पर मनाया जाए और इस दिन छुट्टी का ऐलान किया जाए भारत समेत लगभग 80 मुल्कों में यह दिवस 1 मई को मनाया जाता है इसके पीछे तर्क है कि यह दिन अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के तौर पर प्रमाणित और प्रतिष्ठित हो चुका है । International labour day-श्रम सुधार की दिशा में सफलता के पुंसर्मन पर केंद्रित होते हैं कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस के अवसर पर समूचे विश्व में विभिन्न स्तर पर सरकारी विभागों द्वारा विभिन्न उद्योगों श्रम संगठन द्वारा विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है आज ही के दिन दुनिया के लोगों के प्रति दिन काम के घंटे 8 घंटे तय किए गए थे इस अवसर पर केंद्रित होते हैं सभी आयोजन मजदूर वर्ग बड़ी बड़ी रैलियां और कार्यक्रमों का आयोजन करता है अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन द्वारा इन सम्मेलनों का आयोजन किया जाता है कई देशों में मजदूरों के लिए कल्याणकारी योजना की घोषणा की जाती है अखबार रेडियो द्वारा मजदूर जागृति कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं भारत में अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस को लेबर डे अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस मई दिवस कामगार दिन इंटरनेशनल वर्कर डे अथवा वर्कर डे भी कहा जाता है विभिन्न उद्योगों के कार्य स्थलों पर नियमानुसार कार्य दर्शाएं और समुचित है अथवा नहीं इसकी पड़ताल भी की जाती है इसके अलावा श्रमिकों के कल्याण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी श्रमिकों को दी जाती है सरकारी और गैर सरकारी संगठनों द्वारा इस दिन उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त करने वाले श्रमिकों को उनके परिजनों को सम्मानित भी किया जाता है। International


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